Verse 101-बारिश-Rain

बादल तुमसे अर्ज़ है इतनी बरसो तुम खुल कर,
बाहर साजन जा न पाएं छोड़ के मुझ को घर |
पर जो उसे लौटना घर हो रुक जाना पल भर,
अटक न जाये कहीं, राह में, पहुँचे सीधे घर ||