Verse 204-पूजा- Prayer

मेरी पूजा के तोहफों का किया नहीं आदर,
इसी लिए चिंता व्यापी है मेरे चित अन्दर |
सपनों में तुम आकर मेरे , तंग बहुत करती हो,
इसी तरह से किया है तुमने मेरे दिल में घर ||

Verse 201-खट्टा मीठा-Sour and Sweet

आस-निराश न समझे मेरा मनवा लाल-बुझक्कड़,
इस देती है मीठा चुम्बन दूजी जड़ती थप्पड़|
इक झगड़ालू लड़ती, दूजी आलिंगन में बांधे ,
दोनों के जब तार जुड़े तब संभला रहता घर ||