Verse 98-इंतज़ार-Wait

इंतज़ार के पल लगते हैं भारी वर्षों पर
प्रति-पल भरता अनगिन चिंता ह्रदय के भीतर |
मधुर-मिलन के साल बीतते आँख झपकते ही ,
इंतज़ार में तिल-तिल करके जलता अपना घर ||

Verse 121 – आज – Present

आज तो बस है आज कहूँ मैं चल तू इसी डगर,
इंतज़ार ही आया हिस्से कल ना आया मगर |
आज को आज ही भोगूँगा कल की जाने कौन,
कल न जाने किसका होगा आज है मेरा घर ||