Verse 216-लहर -Wave

नैय्या है कमज़ोर और लहरें आई है ऊपर ,
धारा में है तेज़ नुकीली चट्टानें-पत्थर।
घाट पे नर्तन करती पीड़ा, घुंगरुं उसके छनकें ,
आशाओं का मांझी , बोलो कैसे पहुँचे घर ||

Verse 155-वास्तविकता- Reality

लोग तमाशा सदा देखते बैठ किनारे पर ,
पर जिस वक़्त पड़ेंगे मुँह पर लहरों के थप्पड़ |
ज़ोर जबर लहरों का समझ में तब उनके आएगा ,
नुक्ताचीनी सब भूलेगी अक्ल करेगी घर ||