Verse 76-मौत – Quietus

मानुष सोचे अमर स्कीमें कुशल हैं कारीगर,
चीलों जैसी मौत घूमती गगन में, भूले पर |
ताक लगी रहती है जिसको-दीखे जो कमज़ोरी,
मार झपट्टा ले जाती है खाली करती घर ||