Verse 179-प्रिय -Beloved

रूप तेरा यह रहने न दे सुधबुध रत्ती भर,
तुझे बैठा कर मेरी सजनी सर और आँखों पर।
ऐसा मेल-मिलाया मैंने शिव-गौरी भी उचके ,
जिस शब तूने रात गुज़री पहली मेरे घर ||

Verse 115- मिलन -Communion

मैं बांधूंगा सेहरा जिसमें आशाओं की झालर,
बाराती बारात में मेरी वायदों के लश्कर |
प्रीत के मैं पंडित बुलवाऊँ, मंत्र प्रेम के सुनने,
रक्त का मैं सुन्दर सजा दूँ तेरे माँग-घर ||