Verse 237-बेघर- Homeless

मुल्ला दे जो बांग तो उसकी बांग अनसुनी ना कर,
पंडित पूजा करे तो सुन ले उसका भी मंतर।
राम-रहीम तो हैं इन छोटी सीमाओं से दूर,
यह सारा ब्रह्माण्ड उसी ‘बेघर’ का अपना घर ||

Verse 166-विप्रलंभ-Separation

सुन विलाप हीर का हरगिज़ ठट्ठा-हँसी न कर,
बारिसशाह का किस्सा सुनकर सिसकी आहें भर |
इक -दूजे को तरसें रहें, दुनिया करे अलग,
शोक भरे दुखांत यह किस्से,शोकाकुल है घर ||

Verse 104-धाकड़ – Fearless

ना मैं मियाँ, राजपूत ना, ना पंडित ना ठक्कर,
मेरी कोई जात नहीं, ना भोट ना मैं गुर्जर |
नाम है धाकड़,काम है धाकड़, मेरी राह भी धाकड़,
इस दो-मुंही दुनिया अंदर कोई न मेरा घर ||

Verse 155-वास्तविकता- Reality

लोग तमाशा सदा देखते बैठ किनारे पर ,
पर जिस वक़्त पड़ेंगे मुँह पर लहरों के थप्पड़ |
ज़ोर जबर लहरों का समझ में तब उनके आएगा ,
नुक्ताचीनी सब भूलेगी अक्ल करेगी घर ||

Verse 152-जीवन काल -Life cycle

सोचें जो-क्या होगा जग का यदि गए वे मर ,
उनके बिना चलेगा कैसे सृष्टि का चक्कर |
उनकी देह को कीड़े खाते, समय बड़ा बलवान,
सृष्टि चलती रहती बनती कब्रें उनका घर ||

Verse 145-दुविधा-Dilemma

हे ईश्वर तुम तृप्त न करना मेरी एक जिगर,
बैठा रहूँ निठल्ला, ऐसी देना नहीं नज़र ||
करूँ ना समझौता हरगिज़ देख के अत्याचार,
एक से निपटूँ एक से उलझूँ, चिंताग्रस्त है घर ||