Verse 153-चांद-Moon

मैं चकोर तू चाँद, चाँदनी तेरी बहुत मधुर ,
आज ना निकला मेरे चंदा, जाने गया किधर |
आसमान में नहीं चाँदनी मैं चहकूँ तो कैसे ,
तभी ‘वीयोगी’ सूना लागे आज तुम्हारा घर ||