Verse 19 – मुद्दई – Prosecutor

इतराता है क्यों कर जातक मार नीरीह कबूतर,
थप्पड एक पड़ा तो पल में होश उड़ेंगे फुर्र |
और कहीं आज़माओ ताकत मत मारो मासूम,
बाहर कहीं जो मिला भेड़िया, जाओगे रोते घर ||

Verse 15 – शिकारी – Hunter

अरे शिकारी मार न पंछी इतना जुल्म न कर,
फल भीषण है इस गुनाह का लागे तूने न डर |
यह निर्बल,बलवान बलि वह देखे सारे पाप,
हँसता- बसता क्यों उजाड़े तू किसी का घर ||