Verse 89-ब्रह्मा-Brahma

जीवन दिया मुझे ब्रह्मा ने, पर जीवन देकर,
सोच रहा है इसको भाते धरती और अम्बर |
सोच रहा हूँ उससे क्या मैं वाद-विवाद में उलझूं,
ब्रह्मा मस्त है अपने घर में, मैं व्याकुल अपने घर ||