Verse 91-जातर-Black magic

ताल ठोंक कर कहे ढोलिया-करता जा ‘जातर’,
‘जड़ियाँ’ खेल तू नाच- नाच कर इसके तालों पर |
मैं तो थाप पे थाप लगाऊँ, आगे तेरी मर्ज़ी
ताल का या प्रसंग तू बन जा, जा बैठा रह तू घर ||

Verse 90-झिण्डी – Shrimp

‘झिड़ी’ के मेले यात्री आकर करते हैं ‘जातर’,
चिंताओं में आकुल होकर सीखते हैं मंतर |
वहम दिलों के, भूत न निकले, जातर-वातर करके,
वहम के कारण भूत-बंगले बनें है उनके घर ||