Verse 80-कब्र- Grave

जीते-जी देकर संखिया गले में कसके सूत,
बेटी की हत्या  करते थे, मांगते थे सब पूत |
हत्याकांड यह राजपूतों का अब जा हुआ है बंद,
 पर मुझ को अब भी लगते हैं, कब्रें सब के वे घर ||