Verse 136-मोहब्बत-Love

तू होती जो फूल मैं होता एक हरा पत्तर  ,
एक-दूसरे की संगत में लेते काट उमर |
अगर काँपते सर्दी में भी रहते हम जुड़ कर,
गर्मी में भी साथ साथ रह सजा ही लेते घर ||