Verse 1 – भेंट – Gift

ले यह भेंट और दे चरणामृत दाता मेरे ठाकुर,
मैं चढ़ावा लेकर आया अपनी कविता ‘घर’ |
ना मैं लाया भेंट रूपया ना ही मांगू दौलत,
मेरी भेंट यह लेकर बाँट आना घर-घर ||