Verse 235-मधुमक्खी- Bee

रस चूसे कलियों-फूलों का यह सारा दिन-भर,
रात को लेखा-जोखा करती बैठ समेटे पर।
मधुमक्खी का काम है मीठा शहद कली का लेकर ,
उससे भरते रहना अपने छत्ते का घर-घर ||

Verse 22 – Sangharsh – Hustle

दिन चढ़ते ही पंख पखेरू , मेहनतकश चाकर,
जीने का संघर्ष है करते फिर कितने यह दिन-भर |
सांझढ़ले जब हो जाते है थक कर चकनाचूर ,
थकन मिटाने दिन भर की वो वापस आते घर||

Verse 83-गांधी-Gandhi

गांधी बना न जाए यारो,पहन के तन पे खद्दर,
गांधी टोपी पहन के या फिर लम्बे देकर लेक्चर |
कर्मों का योगी था गांधी, सत्य था उसका बल,
राज दिलों पे करता था पर स्वयं था वह बेघर ||

Verse 65-मोहिनी – Illusion

छलिया क्षितिज उम्मीद जगा कर डाले सौ चक्कर ,
छल मरीचिका और बनाती पीड़ा को दुःख कर |
जलते-तपते मरुस्थलों मेँ इंसा चलता जाता ,
उफ़क की दूरी काम न होती आस न आती घर ||