Verse 161- आज़ादी -Freedom

मोक्ष और मुक्ति बात है कल्पित मेरे साथ न कर ,
मेरे सीधे सरल ह्रदय को नहीं बना दुष्कर |
मैंने तो बस इतना जाना इतनी मेरी सोच,
आशिक सच्चा इश्क़ करे तो मुक्ति मिलती घर ||

Verse 44 – स्वर्ग – Heaven

मानव के कर्मो का लेख होता है आखिर,
स्वर्ग के मुंशी तब कहते है प्राणी देर न कर|
जितनी देर करो वो उतनी ‘सुरगी घटाते ,
सो बेहतर है रोज़ बैठकर लेखा करले घर ||