Verse 77-चंचल मन-Playful mind

समझ सको तो यह मन ऐबी, पागल न चातुर,
पीड़ा से पैना हो जाता खुशियों से चंचल |
पर विवेक और पागलपन की सीमा साथ सटी,
जाने कौन किधर पिछवाड़ा, कौन दिशा में घर ||