Verse 139 – कर्म – Karma

छत टपके है टप-टप  मेरी, हे मेरे गुरुवर,
भैंस ब्याहे बीते  बरसों, बैल चोर के घर |
तब मानूँ जो कहो ना, मेरे कर्मों में थी खोट,
बैठ मेरे संग सोच-विचारो टपके क्यों कर घर ||

Verse 27 – अल्लाह का घर – God’s House

मंदिर मस्जिद और गिरजों में उमड़े जन के लष्कर,
पाप कमाई बख्षाने को आते हैं अक्सर।
वहम उन्हें है धोखे से ‘वो’ बन जाएगा मूर्ख,
सब का लेखा यहाँ पे रहता यह अल्लाह का घर।।