Verse 236-डुग्गर- Duggar

जम्मू में है ग’रने-वसाका थूहर और कीकर,
साँप, ‘गनाह’ बिच्छू ज़हरीले और विषैल विषधर।
लेकिन यहाँ की बोली मीठी जाने सब यह बात ,
जिस के कारण गूँज रहा है डुग्गर का घर-घर ||

Verse 226-कुंजों- Bower

‘कुंजों’ की निंदा होती है-देश है यह डुग्गर,
छोटे पंखिन से सीमित है इनका सदा सफर |
अन्य कोई भाषा न करती कुंजों का तिरिस्कार ,
इसी लिए की इन कुंजों के बहुत दूर है घर ||

Verse 175-डोगरी -Dogri

डोगरी की बदहाली पर है मुझ को बहुत फिकर,
न कोई पढ़ता-सुनता न ही करता कोई ज़िकर।
शायर इसके इक-दूजे से झिझके-ठिठके रहते,
बिना दौड़ के बेदम होकर बैठे रहते घर ||