Verse 121 – आज – Present

आज तो बस है आज कहूँ मैं चल तू इसी डगर,
इंतज़ार ही आया हिस्से कल ना आया मगर |
आज को आज ही भोगूँगा कल की जाने कौन,
कल न जाने किसका होगा आज है मेरा घर ||