Verse 194-कंटीला-Thorny

वह क्या प्रीत-डगर का राही जिसके मन में डर,
उससे प्रीत निभेगी कैसे सख्त न जिगर।
दिल-ओ-जान की राह के कांटे चुनने पड़ते खुद,
चुभन से डरते रहने पर कंटीला बनता घर ||