Verse 229-प्रणय- Love

छोटे बड़े हकूमत कर न पाते हैं इस पर ,
डाँटो लाख इसे जितना यह माने नहीं मगर।
यह मतिहीन मूढ़ है इसके दास बड़े व छोटे ,
प्रेम की खातिर ऋषि-मुनि भी हुए बहुत बेघर ||

Verse 228-तमक – Fury

जब रूठे तू और फेर ले अपनी तीर-नज़र ,
सौ-सौ बिजली तड़तड़ करती गिरती है दिल पर।
सीने में छाए बेचैनी जीवन मुझे चिढ़ाए ,
यूँ लगता है संशय में आंहें भरता यह घर ||

Verse 227- इंद्रधनुष- Rainbow

इंद्रधनुष के झूले ने है चित्रित किया है अम्बर,
इसका बनना वायु में जल-कण पर है निर्भर |
इसी तरह जीवन में गर न बरसे प्रेम-फुहार ,
फीका-फीका लगने लगता महलों जैसा घर ||

Verse 225- आतुर- Restless

कब से आतुर बैठा हूँ मै तुझसे नेह लगाकर,
और विलग न रह पाउँगा दशा हुई कातर |
मुझे बता प्रियतमा ऐसे प्रेम निभेगा कब तक ,
छोड़ विछोह , आ चलो बनाएँ रास्ता-बस्ता घर ||

Verse 223- जाति पात- Casteism

एक रोज़ पूजा करने मैं पहुंचा राजा के मंदिर,
पंडित की बेटी से मेरी ऐसी लड़ी नज़र |
मैं ठाकुर का बेटा देखूं इस दुनिया की रीत ,
जातपात के झंझट से हैट ढूँढूं अपना घर |

Verse 222-एकाकी-Alone

बिन तेरे मैं साथी, भटकूं दुनिया में दर-दर ,
मेरा कोई हमदम न था तरसा जीवन भर |
चाहत-संशय-तर्क अनगिनत देह में रहे समाये ,
और नसों मैं हुए धमाके ढह गया मेरा घर |

Verse 219-चूज़े -Chicks

चलो सुनें चूं- चूं चूसों की मुर्गों की कुड़- कुड़ ,
मन किया तो मोल से लेंगे चूज़ा या ‘कुक्कड़’ |
प्रीत भी दिल के टुकड़े कर के इसी तरह है खाती ,
दिल यह समझे प्रेम ही उसका सुखद सुहाना घर ||

Verse 204-पूजा- Prayer

मेरी पूजा के तोहफों का किया नहीं आदर,
इसी लिए चिंता व्यापी है मेरे चित अन्दर |
सपनों में तुम आकर मेरे , तंग बहुत करती हो,
इसी तरह से किया है तुमने मेरे दिल में घर ||

Verse 201-खट्टा मीठा-Sour and Sweet

आस-निराश न समझे मेरा मनवा लाल-बुझक्कड़,
इस देती है मीठा चुम्बन दूजी जड़ती थप्पड़|
इक झगड़ालू लड़ती, दूजी आलिंगन में बांधे ,
दोनों के जब तार जुड़े तब संभला रहता घर ||

Verse 194-कंटीला-Thorny

वह क्या प्रीत-डगर का राही जिसके मन में डर,
उससे प्रीत निभेगी कैसे सख्त न जिगर।
दिल-ओ-जान की राह के कांटे चुनने पड़ते खुद,
चुभन से डरते रहने पर कंटीला बनता घर ||

Verse 179-प्रिय -Beloved

रूप तेरा यह रहने न दे सुधबुध रत्ती भर,
तुझे बैठा कर मेरी सजनी सर और आँखों पर।
ऐसा मेल-मिलाया मैंने शिव-गौरी भी उचके ,
जिस शब तूने रात गुज़री पहली मेरे घर ||

Verse 178-मंदिर -Temple

घर होता है धर्म का मंदिर, मंदिर प्रेम का घर,
मंदिर धर्म का घर होता है-घर प्रेमिल मंदिर।
प्रेम और घर समधी होते हैं मंदिर प्रेम भी समधी,
प्रेम-प्यार से धर्म निभा कर मंदिर बनता घर ||

Verse 177-नफ़रत-Hate

प्रेम की किसने थाह है पाई प्रीत गहन-सागर,
नफ़रत की पैमाईश भी न आसां होती पर।
इतना भेद तो इनका समझ में सबके आता है,
नफ़रत घर को तोड़े लेकिन प्रीत बनाती घर ||

Verse 161- आज़ादी -Freedom

मोक्ष और मुक्ति बात है कल्पित मेरे साथ न कर ,
मेरे सीधे सरल ह्रदय को नहीं बना दुष्कर |
मैंने तो बस इतना जाना इतनी मेरी सोच,
आशिक सच्चा इश्क़ करे तो मुक्ति मिलती घर ||

Verse 160-दीपक-Deepak

लौ से प्यार को साबित करते परवाने जल कर ,
अंधाधुंद स्वतः आ मरते दीपशिखा ऊपर |
जल परवाना  मिट्टी बनता मिट्टी से फिर दीप ,
इसी विधि से दीपक जलते रहते हैं घर-घर ||

Verse 114-महबूब- Lover

तू मस्तानी, है मन-भानी रूप का तू सागर,
ओक लगा के मांग रहा हूँ उंढेल दे तू गागर |
मुझे रूप की तृषा, प्रेम-जल का हूँ मैं तो प्यासा,
छलक रहा है रूप-तरंगित तेरा प्रेमिल घर ||

Verse 150-मृत्यु- Death

मैंने तुम्हे सौंप रखी है प्रेम की जो गागर,
मेरी शवयात्र में लाना बिलकुल खाली कर |
न रोना न शोक मनाना मेरी तुम्हें कसम ,
मेरी अस्थियां डाल के इसमें रखना अपने घर ||

Verse 101-बारिश-Rain

बादल तुमसे अर्ज़ है इतनी बरसो तुम खुल कर,
बाहर साजन जा न पाएं छोड़ के मुझ को घर |
पर जो उसे लौटना घर हो रुक जाना पल भर,
अटक न जाये कहीं, राह में, पहुँचे सीधे घर ||

Verse 102-बादल-Clouds

मेरी जान ! बरसना है तो बरसो बन बौछार,
झिजक, क्लेश मिटा दे सारे तू निर्भय होकर |
घोल दे हर शंका, बह जाने दे हर संशय को,
चलो डुबो दें कसक भरे, गहरे गहवर में घर ||

Verse 154-अंटोनी और क्लियोपैट्रा-Antony and Cleopatra

क्लियोपेट्रा ने छाती से लगा लिया विषधर ,
अंटोनी ने घोंप लिया था  सीने में खंजर |
यह बलिदान मोहब्बत का क्यों नहीं सराहें लोग,
सोहनी और महिवाल के किस्से प्रचलित घर-घर ||

Verse 129-प्रणय-Love

जब मम्मी मंदिर जाती है और डैडी दफ्तर,
मैं खिड़की से करूँ इशारा वो आता अंदर |
पूछ मुझे मत क्या करते हम होता क्या है हाल,
प्रेम-प्यार में तब बनता है घर के अंदर घर ||

Verse 119-प्रेमी -Lover

मुझे खेद है क्यों उपलब्ध न मदिरा का सागर,
क्यों नहीं गुल्ली-डंडा? क्यों न चिड़िया की चूर-मुर |
इन कष्टों में डूबे मुझको याद सताए तेरी ,
फिर सोचूँ सब ठीक है जब तक तुम हो मेरे घर ||

Verse 39 – रंगमंच – Rangmanch

रंगमंच जो घर मेँ हो तो फिर उसके अंदर,
भेदभाव की दीमक लगती है और व्यापे डर |
ऊपर-ऊपर प्रेम दिखावा भीतर विश्वास ,
इसी तरह जर्जर हो जाते है खड़े खड़े ही घर ||

Verse 38 – पहर – Time

समय बहुत ही ज़ोरावर है , किन्तु मौके पर,
रेखा कोई अनजानी सी , खींचो सीने पर |
यही समय तो रास रचाता, देता है सुर ताल ,
प्रेम प्रीत से गीत बने फिर , लाड-प्यार से घर ||

Verse – 24 – आशा – Aasha

प्रीत का मै देवालय बना कर आया था भीतर ,
आशाओं का डीप जला तू प्रीत बना मंदिर|
पर एक देवी प्रीत की मलिका बोली कर्कश बोल,
न ये मंदिर तेरी खातिर न हे तेरा घर ||

Verse 16 – माँ – Mother

खीझ न मेरी अम्मा न तू ऐसे रूठा कर ,
बतलाता हूँ कहाँ रहा मई फिरता यूँ आखिर |
एक गौरेया घर थी बुनती उसको झाड़ा हैरान ,
रहा देखता देर लगी यूँ मुझे लौटते घर ||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी वह गांव बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप अनूप पे जाके अटकी मेरी नज़र |
देख के उसको दिल खिल उठता रखूं उसको पास ,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर

Verse 87- मोहब्बत-Love

घर न होता छत-दीवारें न बेटी-पुत्तर,
घर न होता चारदीवारी, न रिश्ते-मित्तर |
घर होता है प्रीत-तराना, प्यार भरा सुर-ताल,
वारना सिर्फ मकान कहाता, नहीं कहाता घर ||

Verse 61-पिंजरा – Cage

आस सुरो की मारक-धाकड़ घेरे है मिल कर ,
पकड़ दुनाली चले शिकारी जब बोले तीतर |
मौत के डर से कैसे कोई अपनी उमंगें छोड़े ,
ताल-सुरो का गाला जो घोंटे , पिंजरा बनता घर ||

Verse 60-Discover – खोज

काम-रुपयों की सांगत मेँ , हुआ है डर-बेदर,
मेरे लिए खुला डर किसका, कौन-सा मेरा गढ़ |
किस के केश ढकेंगे मेरा नंग-मनंगा तन ,
किसके होंठ रंगेंगे मेरा यह मैला-सा घर ||

Verse-58-प्रेम के दर – Love’s Door

घाव भरवाने को आये है हम प्रेम के दर ,
बहुत यकी है आशाओं को , इस हाकिम के ऊपर |
ज़ख्मो पर फाहे रखता है , कोमल प्रेमिल हाथ ,
हंसी-खेल , आलिंगन , चुम्बन गुड़गुड़ियो का घर ||

Verse 57- दिल- heart

‘प्यार कृपण न, क्यों लगाए तू िक्कड़-दुक्कड़,
अपरिमित है दौलत इसकी , क्या करना गिन कर |
दिल इसका है औरो जैसा , जान लुटा देता है ,
बाँहों मेँ अम्बर भरता है तभी तो इसका घर ||

Verse 52- नज़र – Eyes

तेरी नज़र मेँ तेज़ और तीखे और पैनी नश्तर ,
चुभते है जब तो रहता है इनका मुझे न डर |
कसक सुहानी और मद- महकी यह देते मुझको ,
तभी इन्हे मै बिना निकले लेकर आया घर||

Verse 53- सृजन-Create

इसको चूम या फिर डांटे दुनिया पर निर्भर,
इज़्ज़त दे हर्षित होकर या करे इसे दर-दर |
मेरा सत और तप था जितना सुन्दर इसे बनाया ,
मै जैसा भी कारीगर था वैसा बना यह घर ||

Verse 137 – भाग्य – Destiny

होनी तो होकर रहती है काहे करे फिकर,
तभी कहूँ मैं प्यार तू करले, करले प्यार तू कर |
मिलन ख़ुशी लेकर आएगा, देगा दुःख वियोग,
घर न अपना कहलाएगा, खाली सूना घर ||

Verse 135 – दिल – Heart

कौन अचानक आ धमका है दिल काँपे थर थर ,
आहट किसके पैरों की है जो करती गड़बड़ |
किसकी खुशबू कर जाती है आकर मस्त-मलंग ,
बैठ अकेले सोच रहा हूँ एकल मेरा घर ||

Verse 127 – स्नेह – Affection

सारी खुशियाँ,सोच, वासना प्रीत के हैं चाकर,
इसके मेह्तर-वैद, संतरी सब इसके नौकर |
कोई अगर लालसा जिगर जलाये वह भी इसकी दास,
प्रीत है मलिका, चले हुकूमत इसकी है घर-घर ||

Verse 125 – रौशनी – Light

ईश्वर ने है दिए रात को अनगिन नयन हज़ार,
जब डूबे है सूरज दुनिया सो जाती अक्सर।
लौ की प्यासी दुनिया को न मिलते प्रेम-सपन,
लालटेन पाकर अँधियारा, जगमग करे है घर।|

Verse 115- मिलन -Communion

मैं बांधूंगा सेहरा जिसमें आशाओं की झालर,
बाराती बारात में मेरी वायदों के लश्कर |
प्रीत के मैं पंडित बुलवाऊँ, मंत्र प्रेम के सुनने,
रक्त का मैं सुन्दर सजा दूँ तेरे माँग-घर ||