Verse 221-चिंता – Tensions

हम आये थे इस दुनिया में बिन दौलत बिन ज़र ,
उम्र बिताई चिंताओं में रहे काँपते थर-थर।
अंत में सत्य समझ यह आया सोच है यह बेकार ,
पुरखे गए, तो हम भी आखिर छोड़ेंगे यह घर ||

Verse 209-पैसा -Money

अपने आप को समझ रहा था मैं बहुत बहादुर,
अकड़ गया सब तोड़, हवा का इक झोंका आकर |
तन के नॉट का छुट्टा लेने निकला मैं बाजार ,
नॉट वह मेरा जाली निकला उजड़ा मेरा घर ||

Verse 202-सर्वज्ञ-Omniscient

दानी चतुर पांखडी करते दान बहुत मगर,
वक़्त पड़े तो मूत्र न पाते ज़ख्मो के ऊपर |
सोचें यदि यह दान से उनके पाप मिटेंगे सारे ,
परमेश्वर से कब भूला है साथी किसी का घर ||

Verse 192-पेंसिल -Pencil

रुपया-पैसा पास नहीं मैं गीतकार फक्कड़,
मेरे पास न लिखने हेतु पेंसिल और पेपर।
सोच रहा मैं पहले थोड़े फ़िल्मी गीत लिखूं,
ताकि थोड़े पेंसिल-काग़ज़ ला पाऊँ मैं घर ||

verse 73-पैसे-Money

रम न दौलत-सम्पत्ति में इनके लिए ना लड़,
पहले खर्च कमाई कर के फिर आराम से मर।
दौलत व जायदाद की खातिर लड़ते सगे-सहोदर,
इस कारण धन जोड़ ना ज़्यादा, मुफ़्लिस कर ले घर ||

Verse 26 – शराब – Alcohol

मज़दूर के पैसे लेके जाता ठेके पर,
घर आकर फिर गर्जन करता यह कंजरी का घर |
प्रेत नशा, न दिखते उसको बच्चे भूखे-प्यासे,
घर घोंसला होता है जो समझे उसको घर ||

Verse 28 – जोड़ – Connection

जो बेघर हैं उनके हित में इस दुनिया अंदर ,
अपना नहीं ठिकाना कोई ना ही अपना दर |
करें चाकरी घर-घर जा कर जमा करें दौलत ,
आशा है तो केवल इतनी हो अपना भी घर ||

Verse 31 – चोर बजारी – Deception

बहुत मिला धन कुछ लोगो को मिला ना चैन मगर ,
चोर – बाजारी के कारण ही मन में समाया डर
मखमल के गद्दों पर भी न आती नींद उन्हें ,
चोर यदी मन में आ बैठे नरक बने है घर ||