Verse 229-प्रणय- Love

छोटे बड़े हकूमत कर न पाते हैं इस पर ,
डाँटो लाख इसे जितना यह माने नहीं मगर।
यह मतिहीन मूढ़ है इसके दास बड़े व छोटे ,
प्रेम की खातिर ऋषि-मुनि भी हुए बहुत बेघर ||