Verse 119-प्रेमी -Lover

मुझे खेद है क्यों उपलब्ध न मदिरा का सागर,
क्यों नहीं गुल्ली-डंडा? क्यों न चिड़िया की चूर-मुर |
इन कष्टों में डूबे मुझको याद सताए तेरी ,
फिर सोचूँ सब ठीक है जब तक तुम हो मेरे घर ||