Verse 118 – वीरता – Bravery

भाव अभी न देहके पूरे मन न हो कातर,
तपन और भड़केगी पीड़ा डालेगी लंगर |
पीड़ा सही नहीं जाती तो कह दो मन की बात,
मैं भेजूँ अनमोल उमीदें किसी और के घर ||