Verse 126-सौंदर्य- Beauty

आँख हिरनिया भवें कमानी काजल है नश्तर,
तेज़ कटीले तीर नज़र के छोड़ मेरी खातिर |
होंठ तुम्हारे नारंगी से दांत मखाने से ,
तू आई तो स्वर्ग बना है भाग-भरा है यह घर ||