Verse 178-मंदिर -Temple

घर होता है धर्म का मंदिर, मंदिर प्रेम का घर,
मंदिर धर्म का घर होता है-घर प्रेमिल मंदिर।
प्रेम और घर समधी होते हैं मंदिर प्रेम भी समधी,
प्रेम-प्यार से धर्म निभा कर मंदिर बनता घर ||