Verse 182-केहरि सिंह “मधुकर”-Kehri Singh “Madhukar”

बदल भैया बरसोगे जब डुग्गर देश में जाकर,
मिलना उससे जिसका नाम है केहरि सिंह ‘मधुकर’ |
मेरी वाह-वाह देकर उसको ‘डोली’ कविता पर,
उसका उत्तर बिना सुने ही लौट आना तुम घर ||

Verse 101-बारिश-Rain

बादल तुमसे अर्ज़ है इतनी बरसो तुम खुल कर,
बाहर साजन जा न पाएं छोड़ के मुझ को घर |
पर जो उसे लौटना घर हो रुक जाना पल भर,
अटक न जाये कहीं, राह में, पहुँचे सीधे घर ||

Verse 102-बादल-Clouds

मेरी जान ! बरसना है तो बरसो बन बौछार,
झिजक, क्लेश मिटा दे सारे तू निर्भय होकर |
घोल दे हर शंका, बह जाने दे हर संशय को,
चलो डुबो दें कसक भरे, गहरे गहवर में घर ||