Verse 60-Discover – खोज

काम-रुपयों की सांगत मेँ , हुआ है डर-बेदर,
मेरे लिए खुला डर किसका, कौन-सा मेरा गढ़ |
किस के केश ढकेंगे मेरा नंग-मनंगा तन ,
किसके होंठ रंगेंगे मेरा यह मैला-सा घर ||

Verse 40 – खोजी – Inquistive

प्यासा मन तो बन जाता है फौलादी औज़ार ,
खोजी खोजें खोज खोज कर जान खुरदुरी कर |
इसी तरह फिर सच्चे खोजी ढूंढे जीवन-सार ,
प्यास बुझाते और बनवाते वह फौलादी घर ||