Verse 180-साहसी-Brave

जीना दूभर हो जाए जब बन जा तू निडर ,
हिम्मत टूट गई तो समझो रहे न खोज-ख़बर।
काम पे जाते बेटे को यह कहती निर्धन माँ,
लौट के तुम आ जाना बेटा अपनी माँ के घर ||

Verse 176-मुखौटा-Mask

बाहर हँसती भीतर-भीतर चुभते हैं खंजर,
पुच-पुच करती चुम्मा देकर ख़ुश करती है पर।
जीवन के संघर्ष और तिस पर घुन-खाया उद्यम,
बात समझ न आए तो फिर ढहता जीवन-घर ||

Verse 105- तैरना-Swim

हिम्मत टूटे तो ले डूबे जीवन जल-गहवर,
हाथ और पैर चलाता जा तू सिर तू ऊपर कर |
इस गहवर से बचना है तो बन जाओ तैराक ,
तभी घाट पे पहुँचोगे पाओगे अपना घर ||

Verse 72-पतंग – Kite

जीवन एक पतंग की नांईं, छूती है अम्बर,
परवाह नहीं जो मांझा देता चीरें हातों पर।
कस के रख तू बिना ढील के, मांझा बहुत है तेज़,
यदि लड़ाने पेंच चढ़ा कर लाने वापिस घर ||