Verse 221-चिंता – Tensions

हम आये थे इस दुनिया में बिन दौलत बिन ज़र ,
उम्र बिताई चिंताओं में रहे काँपते थर-थर।
अंत में सत्य समझ यह आया सोच है यह बेकार ,
पुरखे गए, तो हम भी आखिर छोड़ेंगे यह घर ||

Verse 145-दुविधा-Dilemma

हे ईश्वर तुम तृप्त न करना मेरी एक जिगर,
बैठा रहूँ निठल्ला, ऐसी देना नहीं नज़र ||
करूँ ना समझौता हरगिज़ देख के अत्याचार,
एक से निपटूँ एक से उलझूँ, चिंताग्रस्त है घर ||

Verse 144-चिंता -Worry

नसों में मेरी अजब अनोखी भर देती तिर-मिर,
बिजली है यह सोच की मानो तिल जितना कंकर |
शांत झील में गिरे तो लहरें पैदा करें अनेक,
चिंताओं से काँप रहा है थर-थर मेरा घर ||