Verse 117-असत्यता – Falsity

आस बनाये पागल बोले चल तू मेरी डगर,
मानुष के मन भाएँ धोखे, सब कुछ लागे गुड़ |
धुल झाड़ के सोचे शायद कल होगा उज्जवल,
कल संभवतः बने भयंकर और उजाड़े घर ||

Verse 116-दिल टूटना -Heartbreak

नई रीत यह चली है कैसी अब के तेरे नगर,
जिस से पूछूँ तेरा ठिकाना बरसाए पत्थर |
तेरे  शहर के लोगो ने ना नाम सुना है मेरा,
मेरे लिए या स्वयं तुम्हीं ने बंद कराया घर  ||