Verse 234-अभिलाषा- Desire

छोटे मन की लघु उड़ाने, बड़ों का ऊँचा अम्बर,
छोटे दर्द के छोटे मरुस्थल बालू ज़रा सा भीतर।
पीड़ा बड़ी के लिए चाहिए दिल भी बहुत विशाल ,
हर इक वस्तु माँगे अपने लिए मुनासिब घर ||

Verse 205-इच्छुक और इच्छा-Desire

इच्छा, इच्छुक ऐसे जैसे युध और शस्त्र ,
इच्छुक हिट इच्छा होती है बहुत ज़रूरी पर |
जब इच्छुक की गाडी में इच्छा का ईंधन न हो,
गतिहीन चलने का केवल इच्छुक रहता घर ||

Verse 99-इच्छा- wish

इच्छा, इच्छुक ऐसे जैसे जंगें और शस्त्र,
इच्छुक की इच्छा होती है बहुत ज़रूरी, पर |
गर इच्छुक न करे ख़्वाहिश युद्ध कभी न होता,
टंगे दीवारों पर रहते हैं अस्त्र-शस्र तब घर ||

Verse 28 – जोड़ – Connection

जो बेघर हैं उनके हित में इस दुनिया अंदर ,
अपना नहीं ठिकाना कोई ना ही अपना दर |
करें चाकरी घर-घर जा कर जमा करें दौलत ,
आशा है तो केवल इतनी हो अपना भी घर ||

Verse 40 – खोजी – Inquistive

प्यासा मन तो बन जाता है फौलादी औज़ार ,
खोजी खोजें खोज खोज कर जान खुरदुरी कर |
इसी तरह फिर सच्चे खोजी ढूंढे जीवन-सार ,
प्यास बुझाते और बनवाते वह फौलादी घर ||

Verse 45 – मकड़ जाल – Toils

इच्छाओं का त्याग करूँगा, प्रण किया अक्सर,
इसी तरह यह प्रन भी मेरा है तो इच्छा, पर |
अर्थ यह गहरे शब्दों के, मकड़जाल हैं बनते,
घर को जब त्यागो तब बनती यही लालसा घर ||

Verse 2 – जीवन – Life

एक टुकड़ा मैं रोटी मांगू सोने से बस नुक्कड़ ,
इक पल मांगू मुस्काने को , इस धरती के ऊपर |
रोने का एक पहर मैं मांगू , लोटा एक शराब,
ओक से रह-रह पीड़ा चलके , यही है जीवन घर ||